राजयोग के माध्यम से अपनी कर्मेन्द्रियों पर संयम रखकर और कर्म में कुशलता लाकर सकारात्मक चिंतन, वृत्ति और दृष्टिकोण का विकास होता है, जिससे हम व्यर्थ के विचारों से बच सकते हैं। राजयोग का नियमित अभ्यास हमें तनावमुक्त बनाता है और अनेक मानसिक व शारीरिक बीमारियों से हमारी रक्षा करता है।
