कटघोरा के आयुर्वेदिक औषधालय में पंचकर्म थेरेपी ठप, जीवन रक्षक दवाओं की किल्लत से भटक रहे मरीज,,,
कटघोरा (कोरबा) नगर पालिका परिषद कटघोरा स्थित वर्षों पुराने आयुर्वेदिक औषधालय की व्यवस्थाएं बीते 6 महीनों से पूरी तरह चरमरा गई हैं। कभी क्षेत्र के ग्रामीण और नगरवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने वाला यह प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र आज खुद बदहाली के आंसू बहा रहा है। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाइयों की भारी कमी और पंचकर्म जैसी महत्वपूर्ण थेरेपी सेवा बंद होने के कारण जरूरतमंद मरीजों को खाली हाथ और निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
,,भवन और जगह की कमी बनी रोड़ा,,
संस्था प्रभारी से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में पर्याप्त स्थान और उपयुक्त भवन न होने के कारण व्यवस्थाएं पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी हैं।
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थेरेपी पर ब्रेक: पर्याप्त जगह न होने की वजह से पंचकर्म एवं अन्य आयुर्वेदिक थेरेपी का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
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दवाइयों के भंडारण में परेशानी: स्थान के अभाव में दवाइयों का सही ढंग से रखरखाव और भंडारण नहीं हो पा रहा है, जिससे दवाइयों का संकट खड़ा हो गया है।
,,पुराना भवन तैयार, फिर भी हस्तांतरण में देरी,,
स्थानीय निवासियों का कहना है कि औषधालय का पुराना भवन रिपेयर होकर पूरी तरह से तैयार हो चुका है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण अस्पताल को पुराने भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है। इस देरी के चलते क्षेत्रवासी शासन की महत्वपूर्ण और जीवनदायिनी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
,,क्षेत्रवासियों ने उठाई मांग,,
कटघोरा और आसपास के विशाल ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का आयुर्वेद पर अटूट विश्वास रहा है। रोज दर्जनों मरीज इलाज और दवाओं की उम्मीद में अस्पताल पहुँचते हैं, लेकिन अव्यवस्था देखकर उनमें भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि:
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तैयार हो चुके भवन में औषधालय को अविलंब स्थानांतरित किया जाए।
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जीवन रक्षक और आवश्यक आयुर्वेदिक औषधियों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित हो।
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पंचकर्म और अन्य थेरेपी सुविधाओं को तत्काल प्रभाव से पुनः शुरू कराया जाए।














