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    Home » कोरबा में दूर हुई शिक्षकों की कमी: डीएमएफ से 480 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यार्थियों में उत्साह, बेरोजगार युवाओं को मिला रोजगार,,
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    कोरबा में दूर हुई शिक्षकों की कमी: डीएमएफ से 480 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यार्थियों में उत्साह, बेरोजगार युवाओं को मिला रोजगार,,

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल02/08/2025
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    कोरबा में दूर हुई शिक्षकों की कमी: डीएमएफ से 480 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यार्थियों में उत्साह, बेरोजगार युवाओं को मिला रोजगार,,

    कोरबा, छत्तीसगढ़: 2 अगस्त 2025 को कोरबा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। जिला प्रशासन ने खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के तहत 480 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है, जिससे न केवल स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने में मदद मिली है, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार और अध्यापन का अवसर भी प्राप्त हुआ है। इस पहल का सबसे अधिक लाभ दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों, जैसे पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पचरा के शासकीय हाई स्कूल, को हुआ है, जहां अब विद्यार्थियों को सभी विषयों की नियमित पढ़ाई का लाभ मिल रहा है। इस कदम ने विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों में नई उम्मीद जगाई है।
    पचरा हाई स्कूल में बदली तस्वीर
    कोरबा शहर से लगभग 80 किलोमीटर दूर पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पचरा, कोरबी स्थित शासकीय हाई स्कूल क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इस स्कूल में आसपास के गांवों से आने वाले विद्यार्थी भविष्य को संवारने की उम्मीद के साथ दाखिला लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस स्कूल में नियमित शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या थी। कई विषयों के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण विद्यार्थियों को अधूरी पढ़ाई से जूझना पड़ता था, जिससे न केवल उनका मनोबल प्रभावित होता था, बल्कि उनके माता-पिता भी चिंतित रहते थे।

    जिला प्रशासन ने इस समस्या का समाधान खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से मानदेय आधारित अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति करके किया। इस पहल के तहत पचरा हाई स्कूल में अब सभी विषयों के लिए शिक्षक उपलब्ध हैं। स्कूल में कक्षा 9वीं में 48 और कक्षा 10वीं में 25 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषयों के लिए पहले से शिक्षक मौजूद थे, लेकिन अब मानदेय शिक्षिकाओं द्वारा हिंदी, सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों की पढ़ाई भी नियमित रूप से कराई जा रही है। इससे स्कूल में कोई भी कालखंड खाली नहीं जाता, और विद्यार्थियों को सभी विषयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।
    अतिथि शिक्षकों की खुशी
    इस भर्ती प्रक्रिया ने न केवल विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाया, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया। पचरा हाई स्कूल में मानदेय शिक्षक के रूप में कार्यरत शिक्षिकाएं अभिलाषा सिंह तंवर और लक्ष्मी कुमारी ने अपनी खुशी जाहिर की। दोनों ने बताया कि उन्होंने मास्टर डिग्री के बाद बीएड की पढ़ाई पूरी की थी ताकि वे शिक्षण के क्षेत्र में योगदान दे सकें। जब जिला प्रशासन ने डीएमएफ के तहत मानदेय शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की, तो उन्होंने आवेदन किया और अब स्कूल में पढ़ाने का मौका मिला है।
    अभिलाषा और लक्ष्मी ने बताया कि मानदेय शिक्षक के रूप में नियुक्ति उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। इससे न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सहारा मिला है, बल्कि वे अपने ज्ञान को विद्यार्थियों तक पहुंचाने में भी सक्षम हो रही हैं। मानदेय से उनके घर का खर्च चलाने में सहूलियत हो रही है, और विद्यार्थियों की पढ़ाई में उनकी भूमिका से उन्हें आत्मसंतुष्टि मिल रही है।

    विद्यार्थियों में उत्साह

    पचरा हाई स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं विद्या, मानमती, और सुहानी यादव ने बताया कि पहले स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण कुछ विषयों की पढ़ाई नियमित नहीं हो पाती थी। लेकिन अब नए अतिथि शिक्षकों के आने से सभी विषयों की पढ़ाई सुचारू रूप से हो रही है। उनका कहना है कि स्कूल में पढ़ाई का माहौल बेहतर हुआ है, जिससे उनका मन स्कूल आने के लिए और अधिक उत्साहित रहता है। स्कूल में दूर-दूर के गांवों से आने वाले लड़के-लड़कियों को भी अब पढ़ाई में कोई कमी नहीं महसूस होती।
    डीएमएफ के तहत भर्ती प्रक्रिया
    जिला प्रशासन ने डीएमएफ के माध्यम से जिले के उन सभी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने का बीड़ा उठाया, जहां युक्तियुक्तकरण के बाद भी शिक्षक उपलब्ध नहीं थे। इसके तहत कुल 480 अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जा रही है, जिसमें प्राथमिक शालाओं के लिए 243, माध्यमिक शालाओं के लिए 109, और हाई तथा हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए 128 व्याख्याताओं के पद शामिल हैं।

    विशेष रूप से, इस भर्ती प्रक्रिया में उन अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो पिछले शिक्षण सत्र में कार्यरत थे। इसके साथ ही, मानदेय में भी वृद्धि की गई है। इस सत्र में प्राथमिक स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 11,000 रुपये, मिडिल स्कूल के अतिथि शिक्षकों को 13,000 रुपये, और हाई/हायर सेकेंडरी स्कूल के व्याख्याताओं को 15,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। यह पिछले वर्ष के मानदेय (भृत्य के लिए 8,000 रुपये, प्राथमिक के लिए 10,000 रुपये, मिडिल के लिए 12,000 रुपये, और हाई/हायर सेकेंडरी के लिए 14,000 रुपये) की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।

    चोटिया कोरबी आत्मानंद स्कूल में भी उम्मीद,,

    इस भर्ती प्रक्रिया से चोटिया कोरबी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में भी नई उम्मीद जगी है। इस स्कूल में भी शिक्षकों की कमी थी, लेकिन अब अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से पढ़ाई का स्तर बेहतर होने की संभावना है। यह स्कूल क्षेत्र के उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो इंग्लिश मीडियम में शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।

    सामाजिक और शैक्षिक प्रभाव
    जिला प्रशासन की इस पहल ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किया है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। साथ ही, विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने से उनका भविष्य उज्ज्वल होने की संभावना बढ़ी है।

    अभिभावकों की चिंता भी कम हुई है, क्योंकि अब उनके बच्चों को सभी विषयों में विशेषज्ञ शिक्षकों से पढ़ाई का अवसर मिल रहा है।

                      ,,निष्कर्ष,,

    कोरबा जिला प्रशासन की यह पहल शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। डीएमएफ के तहत अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति ने जहां एक ओर स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर किया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भविष्य में ऐसी पहल को और व्यापक करने की आवश्यकता है ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हर शिक्षित युवा को रोजगार का अवसर मिल सके।

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    विनोद जायसवाल

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