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    खरीफ फसलों के लिए खाद वितरण के नए नियम जारी: छोटे किसानों को एकमुश्त, बड़े किसानों को किश्तों में मिलेगा यूरिया; नैनो यूरिया को बढ़ावा

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल25/05/2026
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    खरीफ फसलों के लिए खाद वितरण के नए नियम जारी: छोटे किसानों को एकमुश्त, बड़े किसानों को किश्तों में मिलेगा यूरिया; नैनो यूरिया को बढ़ावा

    ​कोरबा। खरीफ सीजन 2026 में जिले के किसानों को पर्याप्त और संतुलित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इस वर्ष उर्वरक वितरण के लिए नए और कड़े मापदंड तय किए गए हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों की कालाबाजारी रोकना, यूरिया की खपत को नियंत्रित करना और फसलों को संतुलित पोषक तत्व प्रदान करना है।
    ​उर्वरक वितरण का नया फॉर्मूला: पिछले वर्ष के आधार पर तय होगी मात्रा
    ​इस वर्ष किसानों को मिलने वाले पारंपरिक यूरिया और डी.ए.पी. (DAP) की मात्रा पिछले वर्ष (खरीफ 2025) में उनके द्वारा उठाए गए खाद के आधार पर तय की जाएगी:
    ​यूरिया का कोटा: पिछले वर्ष वितरित यूरिया की कुल मात्रा का 80 प्रतिशत ही इस बार पारंपरिक यूरिया के रूप में मिलेगा। शेष 20 प्रतिशत हिस्सा पारंपरिक यूरिया की उपलब्धता होने पर दिया जाएगा, अन्यथा किसानों को इसके बदले नैनो यूरिया प्रदाय किया जाएगा।
    ​डी.ए.पी. का कोटा: पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 60 प्रतिशत ही पारंपरिक डी.ए.पी. मिलेगा। बाकी बचा 40 प्रतिशत हिस्सा वैकल्पिक एन.पी.के. (NPK) उर्वरकों या नैनो डी.ए.पी. के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
    ​बोरी की गणना का नियम (राउंड फिगर)
    ​खाद का निर्धारण बोरियों की संख्या के आधार पर होगा। यदि गणना में संख्या दशमलव (पॉइंट) में आती है, तो उसे निकटतम पूर्णांक माना जाएगा।
    ​उदाहरण: यदि किसी किसान की पात्रता 7.2 बोरी आती है तो उसे 7 बोरी और यदि 7.8 बोरी आती है तो उसे 8 बोरी खाद स्वीकृत की जाएगी।
    ​किसानों की श्रेणी के अनुसार किश्तों में वितरण
    ​समितियों में भीड़ और किल्लत से बचने के लिए किसानों की भूमि धारिता (जमीन के रकबे) के अनुसार वितरण की व्यवस्था की गई है:
    ​सीमांत कृषक (2.5 एकड़ तक जमीन): जिले के सभी सीमांत किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार निर्धारित खाद की पूरी मात्रा एकमुश्त (एक बार में) दे दी जाएगी।
    ​लघु कृषक (2.5 से 5 एकड़ तक जमीन): इन किसानों को निर्धारित कोटे का यूरिया 2 किश्तों में प्रदाय किया जाएगा।
    ​बड़े कृषक (5 एकड़ से अधिक जमीन): बड़े किसानों को यूरिया की पात्रता 3 किश्तों में मिलेगी। इसमें पहली किश्त के 20 दिन बाद दूसरी किश्त और दूसरी किश्त के 20 दिन बाद ही तीसरी किश्त का उठाव किया जा सकेगा।
    ​वैकल्पिक एवं जैविक खादों को बढ़ावा, समितियों में भंडारण शुरू
    ​रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने के लिए कृषि विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर हरी खाद और जैव उर्वरकों (Bio-fertilizers) के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
    ​हरी खाद का भंडारण: सहकारी समितियों में हरी खाद के लिए ढेंचा और मूंग के बीजों का भंडारण शुरू कर दिया गया है।
    ​जैव उर्वरक: कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर नील हरित काई (Blue Green Algae), एजोस्पिरिलियम और पीएसबी (PSB) के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। किसानों से स्थानीय स्तर पर नील हरित काई का उत्पादन भी कराया जा रहा है।
    ​वैज्ञानिकों की सलाह: कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रचार-प्रसार सामग्री (पोस्टर-पाम्पलेट) बांटी जा रही है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डी.ए.पी. के स्थान पर एसएसपी (SSP), टीएसपी (TSP) और एनपीके (NPK) जैसे मिश्रित उर्वरकों का उपयोग करें, जिससे फसल को संतुलित पोषण मिले।
    ​अत्यधिक खरीदी से बचें किसान: उप संचालक कृषि
    ​उप संचालक कृषि, कोरबा ने जिले के सभी कृषकों को समझाइश दी है कि वे खादों के अनावश्यक भंडारण और अत्यधिक प्रयोग से बचें। किसान भाई अपनी आवश्यकता के अनुसार निकटतम सहकारी समिति या निजी विक्रय केंद्रों से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा के आधार पर ही अपने रकबे के अनुसार खाद का उठाव करें।

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    विनोद जायसवाल

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