छत्तीसगढ़ में ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ के बढ़ते मामलों पर पूर्व विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने जताई चिंता; राज्यपाल को लिखा पत्र, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
छत्तीसगढ़ में ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ के बढ़ते मामलों पर पूर्व विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने जताई चिंता; राज्यपाल को लिखा पत्र, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग,,
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अदालत की अवमानना (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस विषय पर राज्यपाल रमेन डेका को एक पत्र लिखकर न्यायालयीन आदेशों के पालन के प्रति राज्य शासन का ध्यान आकर्षित करने और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। ## कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर उठाए सवाल मोहम्मद अकबर ने अपने पत्र में कहा कि अवमानना प्रकरणों में लगातार वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रशासनिक स्तर पर न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने मांग की कि कानून के शासन और न्यायिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए इन आदेशों के प्रभावी पालन की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आधिकारिक आंकड़े: 4 वर्षों में 87% की भारी वृद्धि पूर्व विधि मंत्री ने राज्यपाल से साझा किए गए पत्र में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिकाओं के आधिकारिक आंकड़े भी प्रस्तुत किए, जो पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां करते हैं
:वर्षदायर अवमानना याचिकाएं (कंटेम्प्ट केसेस)स्थिति / बदलाव 20211,010शुरुआती आंकड़ा 20221,279मामलों में बढ़ोतरी 20231,185मामूली गिरावट 20241,504मामलों में फिर तेजी 20251,884हाल के वर्षों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड 2026 (14 जून तक)744
बड़ा विश्लेषण: वर्ष 2021 (1,010 मामले) की तुलना में वर्ष 2025 (1,884 मामले) तक आते-आते अवमानना के मामलों में लगभग 87 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। ## क्यों आते हैं अदालत की अवमानना के मामले? कानूनी विशेषज्ञों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत की अवमानना के मामले सामान्यतः तब सामने आते हैं जब: किसी न्यायालय द्वारा दिए गए स्पष्ट आदेश का पालन नहीं किया जाता। आदेश के पालन में अधिकारियों द्वारा अनावश्यक देरी की जाती है। न्यायिक प्रक्रिया या आदेशों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न की जाती है। ऐसी स्थिति में प्रभावित पक्ष न्याय के लिए पुनः न्यायालय की शरण लेकर अवमानना याचिका दायर करता है। ## प्रशासनिक जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी मोहम्मद अकबर ने जोर देकर कहा कि बढ़ते अवमानना मामलों को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े एक गंभीर संकेत के रूप में समझना आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि राज्यपाल इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य शासन को आवश्यक निर्देश देने की पहल करेंगे। विशेषज्ञों का भी मानना है कि न्यायालय के आदेशों का समयबद्ध और प्रभावी पालन सुनिश्चित करना ही लोकतंत्र में कानून के शासन को मजबूत बनाने की दिशा में सबसे आवश्यक कदम है।