Close Menu
Jan Jan Ki AwaazJan Jan Ki Awaaz
    What's Hot

    भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका! चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट का आदेश बरकरार, पाटन चुनाव विवाद की सुनवाई का रास्ता साफ

    03/11/2026

    नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में मिलेगी नई पहचान, 16 एकड़ में लगा अभियान* विकसित भारत संकल्प पार्क में 2,500 से अधिक पीपल और 500 स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगे,,

    03/11/2026

    जनदर्शन में उमड़ी फरियादियों की भीड़, कलेक्टर ने सुनीं समस्याएं; 41 आवेदनों पर अधिकारियों को समय-सीमा में कार्रवाई के निर्देश

    03/11/2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Jan Jan Ki AwaazJan Jan Ki Awaaz
    • खास ख़बर
    • कोरबा
    • छत्तीसगढ़
    • देश
    • मनोरंजन
    • खेलकूद
    • बिहार
    • व्यापार
    • ज्ञान विज्ञान
    Jan Jan Ki AwaazJan Jan Ki Awaaz
    Home » पटवारी आंदोलन पर किसानों का फूटा गुस्सा! धान खरीदी और गिरदावली के वक्त ही हड़ताल क्यों? किसानों ने उठाए गंभीर सवाल, शासन से सख्त कार्रवाई की मांग
    Uncategorized

    पटवारी आंदोलन पर किसानों का फूटा गुस्सा! धान खरीदी और गिरदावली के वक्त ही हड़ताल क्यों? किसानों ने उठाए गंभीर सवाल, शासन से सख्त कार्रवाई की मांग

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल03/11/2026
    Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

    पटवारी आंदोलन पर किसानों का फूटा गुस्सा! धान खरीदी और गिरदावली के वक्त ही हड़ताल क्यों? किसानों ने उठाए गंभीर सवाल, शासन से सख्त कार्रवाई की मांग

    पीवी ऐप के विरोध के बीच किसानों की परेशानी बढ़ी, पटवारी संघ की मांगों और आंदोलन की मंशा पर उठने लगे सवाल; राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों और शोषण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग

    छत्तीसगढ़। प्रदेश में पटवारी संघ का आंदोलन लगातार विवादों के घेरे में आता जा रहा है। एक ओर पटवारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों में इस आंदोलन को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। किसानों का कहना है कि जब खेती-किसानी के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण समय चल रहा है, तब पटवारियों द्वारा आंदोलन का रास्ता अपनाना आखिर किसके हित में है?

    धान खरीदी का महत्वपूर्ण सीजन और फसलों की गिरदावरी जैसी जरूरी प्रक्रियाओं के बीच पटवारियों की हड़ताल ने ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। किसानों का आरोप है कि इस आंदोलन का खामियाजा सीधे उन्हें भुगतना पड़ रहा है। एक तरफ किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने की तैयारी में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ भूमि अभिलेख, फसल सत्यापन और एग्रीस्टैक से संबंधित कार्यों में रुकावटें सामने आ रही हैं।

    धान खरीदी और गिरदावली के समय ही आंदोलन क्यों? किसानों का बड़ा सवाल

    किसानों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पटवारी संघ ने आंदोलन के लिए आखिर इसी समय का चयन क्यों किया? जब किसानों को फसल सत्यापन, गिरदावली और धान खरीदी से संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं में पटवारियों की आवश्यकता सबसे अधिक होती है, उसी समय आंदोलन शुरू होने से ग्रामीण किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

    किसानों का कहना है कि यदि पटवारियों को अपनी मांगों को लेकर शासन के समक्ष विरोध दर्ज कराना है तो वे इसके लिए अन्य लोकतांत्रिक और विभागीय विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन ऐसा समय चुनना, जब किसानों की पूरी खेती-किसानी सरकारी सत्यापन और राजस्व रिकॉर्ड पर निर्भर हो, आम किसानों को संकट में डालने जैसा है।

    कुछ किसानों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि आंदोलन के समय और उसके प्रभाव को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि शासन पर दबाव बनाने के लिए किसानों के जरूरी कामकाज को प्रभावित किया जा रहा है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    किसानों का तीखा आरोप—क्या किसान सिर्फ चारागाह बनकर रह गए हैं?

    पटवारी व्यवस्था को लेकर ग्रामीण किसानों में लंबे समय से असंतोष की शिकायतें सामने आती रही हैं। किसानों का आरोप है कि जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में छोटी-छोटी त्रुटियों, खसरा, रकबा, फसल प्रविष्टि, नामांतरण और अन्य अभिलेखों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें बार-बार पटवारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

    कुछ किसानों ने आरोप लगाया है कि राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियां बताकर उन्हें लंबे समय तक परेशान किया जाता है और कई मामलों में रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी की शिकायतें भी सामने आती हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन और फसल से जुड़े दस्तावेजों पर निर्भरता का फायदा उठाकर उनका आर्थिक और मानसिक शोषण किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

    किसानों की नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या पटवारी व्यवस्था का उद्देश्य किसानों की मदद करना है या उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगवाना? हालांकि ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मामलों की दस्तावेजी जांच और निष्पक्ष पड़ताल आवश्यक है।

    आंदोलन के नाम पर शासन पर दबाव बनाने का आरोप

    किसानों का कहना है कि पटवारी संघ की मांगों और आंदोलन के तरीके को अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। कर्मचारियों को अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन सरकारी व्यवस्था में उनकी जिम्मेदारियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

    किसानों के एक वर्ग का आरोप है कि पटवारी संघ अपनी मांगों को मनवाने के लिए ऐसे समय पर आंदोलन कर रहा है, जब शासन के सामने धान खरीदी और गिरदावली जैसी बड़ी जिम्मेदारियां हैं। इससे सरकार और प्रशासन पर दबाव बनता है और अंततः आम किसान प्रभावित होता है।

    किसानों ने इस स्थिति को शासन को दबाव में लेने की कोशिश बताते हुए सवाल उठाया है कि क्या किसी कर्मचारी संगठन को अपनी मांगों के लिए लाखों किसानों के जरूरी काम प्रभावित करने का अधिकार होना चाहिए?

    पीवी ऐप का विरोध और पटवारियों की मांगें

    पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में पीवी ऐप की तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान शामिल है। संघ का कहना है कि नए ऐप के माध्यम से फसल का भौतिक सत्यापन यानी गिरदावरी करने में कई तरह की कठिनाइयां आ रही हैं। संघ ने ऐप में सुधार अथवा इसे बंद करने की मांग भी उठाई है।

    इसके अलावा आंदोलनकारी पटवारी अपने खिलाफ की जा रही नोटिस, तबादले और निलंबन जैसी कार्रवाइयों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।

    संघ की अन्य मांगों में वर्ष 2017 के बाद से चली आ रही वेतन विसंगति दूर करना तथा वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना भी शामिल है। पटवारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान किए बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

    प्रशासन की सख्ती, पांच पटवारियों के निलंबन की खबर

    आंदोलन के बीच प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार बलरामपुर जिले में मुख्यालय में अनुपस्थित रहने के मामले में पांच पटवारियों को निलंबित किया गया है। सरगुजा संभाग में भी कार्रवाई की तैयारी की जानकारी सामने आई है।

    कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा की ओर से भी चेतावनी दिए जाने की खबर है कि निर्धारित समय पर मुख्यालय में उपस्थित नहीं होने और नोटिस का जवाब नहीं देने वाले पटवारियों के खिलाफ नियमानुसार एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।

    प्रशासन का तर्क है कि शासकीय दायित्वों का निर्वहन और आम जनता के कार्यों को समय पर पूरा करना आवश्यक है।

    एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी में फंसे किसानों की बढ़ सकती है परेशानी

    इस आंदोलन का सबसे गंभीर प्रभाव डिजिटल कृषि व्यवस्था पर पड़ सकता है। पहले से ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में एग्रीस्टैक, फार्मर आईडी, भूमि सत्यापन और फसल प्रविष्टि से जुड़ी समस्याओं की शिकायतें सामने आती रही हैं।

    किसानों का कहना है कि यदि पटवारी स्तर पर सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया बाधित होती है तो वास्तविक धान उत्पादक किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने में परेशानी हो सकती है।

    कई किसानों के भूमि रिकॉर्ड में वास्तविक खेती के बावजूद गलत फसल दर्ज होने, खसरा अनुमोदन लंबित रहने और रिकॉर्ड में सुधार नहीं होने जैसी समस्याओं का सामना करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे समय में पटवारी आंदोलन इन समस्याओं को और गंभीर बना सकता है।

    शासन को करनी चाहिए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय

    किसानों की बढ़ती नाराजगी के बीच शासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं का निराकरण करना है, तो दूसरी तरफ किसानों के जरूरी कामकाज को किसी भी परिस्थिति में बाधित होने से बचाना है।

    किसानों की मांग है कि शासन पटवारियों की मांगों और आंदोलन की परिस्थितियों की समीक्षा करे। साथ ही जिन कर्मचारियों के विरुद्ध किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी, अनावश्यक परेशान करने अथवा कथित आर्थिक शोषण की शिकायतें हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।

    धान खरीदी और गिरदावली जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी किसान को अपनी उपज बेचने से वंचित न होना पड़े।

    सबसे बड़ा सवाल—कर्मचारियों की लड़ाई में किसान क्यों भुगते नुकसान?

    पटवारी संघ और शासन के बीच चल रहे इस टकराव ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही का सवाल खड़ा कर दिया है। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, प्रशासन कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है और किसान अपनी उपज तथा जमीन से जुड़े जरूरी कामों को लेकर परेशान हैं।

    किसानों का कहना है कि शासन को इस पूरे मामले में केवल आंदोलन समाप्त कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

    अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन पटवारी संघ की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। आखिरकार सरकारी व्यवस्था कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता और किसानों की सेवा के लिए बनाई गई है। किसानों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

    जन-जन की आवाज | कटघोरा, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़)

    Share. Facebook Twitter
    विनोद जायसवाल

    Related Posts

    भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका! चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट का आदेश बरकरार, पाटन चुनाव विवाद की सुनवाई का रास्ता साफ

    03/11/2026

    नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में मिलेगी नई पहचान, 16 एकड़ में लगा अभियान* विकसित भारत संकल्प पार्क में 2,500 से अधिक पीपल और 500 स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगे,,

    03/11/2026

    जनदर्शन में उमड़ी फरियादियों की भीड़, कलेक्टर ने सुनीं समस्याएं; 41 आवेदनों पर अधिकारियों को समय-सीमा में कार्रवाई के निर्देश

    03/11/2026

    छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, चक्रवात ‘मुरासु’ का असर; 3 और 4 नवंबर को भारी बारिश की चेतावनी

    03/11/2026

    सूरजपुर में हाथियों का खूनी तांडव! महज दो घंटे में दो ग्रामीणों की मौत, इलाके में दहशत का माहौल, 

    02/11/2026

    कोरबा में 2 नवंबर को धूमधाम से मनेगा राज्योत्सव-2026, घंटाघर में सजेगा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का महामंच  छत्तीसगढ़ की 26वीं वर्षगांठ पर मंत्री लखनलाल देवांगन होंगे मुख्य अतिथि, लोकगायक सुनील सोनी की आवाज बनेगी मुख्य आकर्षण,,

    01/11/2026
    Editors Picks

    भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका! चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट का आदेश बरकरार, पाटन चुनाव विवाद की सुनवाई का रास्ता साफ

    03/11/2026

    नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में मिलेगी नई पहचान, 16 एकड़ में लगा अभियान* विकसित भारत संकल्प पार्क में 2,500 से अधिक पीपल और 500 स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगे,,

    03/11/2026

    जनदर्शन में उमड़ी फरियादियों की भीड़, कलेक्टर ने सुनीं समस्याएं; 41 आवेदनों पर अधिकारियों को समय-सीमा में कार्रवाई के निर्देश

    03/11/2026

    पटवारी आंदोलन पर किसानों का फूटा गुस्सा! धान खरीदी और गिरदावली के वक्त ही हड़ताल क्यों? किसानों ने उठाए गंभीर सवाल, शासन से सख्त कार्रवाई की मांग

    03/11/2026
    About Us
    About Us

    Founder: Vinod Jaiswal
    Mobile : 8770560852 Email : janjankiawaaznews@gmail.com

    Follow for More
    • Facebook
    • Twitter
    • Instagram
    • YouTube
    Category
    • Uncategorized
    • कोरबा
    • खास ख़बर
    • छत्तीसगढ़
    • देश
    © 2026 Jan Jan ki Awaaz. Designed by Nimble Technology.
    • Home
    • Privacy Policy
    • Contact Us
    • Terms and Conditions

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.