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    Home » बगबुडीपारा प्राथमिक शाला जर्जर, भवन और एक छोटे कमरे में पांच कक्षाओं का संचालन, बच्चों के भविष्य पर मंडराता खतरा,,
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    बगबुडीपारा प्राथमिक शाला जर्जर, भवन और एक छोटे कमरे में पांच कक्षाओं का संचालन, बच्चों के भविष्य पर मंडराता खतरा,,

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल17/07/2025
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    बगबुडीपारा प्राथमिक शाला जर्जर, भवन और एक छोटे कमरे में पांच कक्षाओं का संचालन, बच्चों के भविष्य पर मंडराता खतरा,,

    कोरबा कटघोरा—–  जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा के ग्राम पंचायत कुल्हरिया के आश्रित ग्राम बगबुडीपारा में प्राथमिक शाला कई दशकों से संचालित हो रही है। यह शाला क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का महत्वपूर्ण केंद्र है, लेकिन वर्तमान में इस स्कूल का भवन जर्जर स्थिति में है, जिसके कारण बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल के जर्जर भवन के कारण पढ़ाई-लिखाई प्रभावित हो रहा है, और बच्चों का भविष्य खतरे में है।
    जर्जर भवन और पढ़ाई में बाधा
    बगबुडीपारा प्राथमिक शाला का भवन कई वर्षों से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका है। दीवारों में दरारें, टपकती छत, और सड़ चुकी दरवाजे खिड़की इस भवन की स्थिति को और भी खतरनाक बना रही हैं। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने की समस्या और गंभीर हो जाती है, जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल पाता। इस जर्जर भवन में पढ़ाई करना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए भी जोखिम भरा है।
    जर्जर भवन के कारण स्कूल प्रबंधन को मजबूरन एक अतिरिक्त छोटे से कमरे में कक्षा 1 से 5 तक की सभी कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है। इस छोटे से कमरे में सभी कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे न तो बच्चों को पढ़ाई में एकाग्रता मिल पाती है और न ही शिक्षकों को पढ़ाने में सुविधा। यह स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
    प्रधान पाठक की गुहार: बार-बार शिकायत, फिर भी नहीं कोई सुनवाई
    स्कूल के प्रधान पाठक बुधवार सिंह मरकाम ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों के समक्ष उठाया है। दर्जनों बार लिखित और मौखिक रूप से भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी दी गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। श्री मरकाम ने कहा, “एक ही छोटे से कमरे में पांच कक्षाओं का संचालन करना बेहद मुश्किल है। बच्चों को पढ़ाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि जर्जर भवन के कारण बच्चों की उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि अभिभावक अपने बच्चों को असुरक्षित भवन में भेजने से डरते हैं।
    अभिभावकों की मांग: नवीन भवन की स्वीकृति
    ग्राम बगबुडीपारा के अभिभावकों ने इस समस्या को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि शिक्षा बच्चों का मूलभूत अधिकार है, लेकिन जर्जर भवन और अपर्याप्त सुविधाओं के कारण उनके बच्चों का भविष्य दांव पर है। अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि बगबुडीपारा प्राथमिक शाला के लिए तत्काल नवीन भवन की स्वीकृति प्रदान की जाए। उनका कहना है कि एक सुरक्षित और सुसज्जित भवन न केवल बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाएगा, बल्कि शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में सहायता मिलेगी।
    क्षेत्र में जर्जर स्कूल भवनों की व्यापक समस्या
    बगबुडीपारा प्राथमिक शाला की यह समस्या कोरबा जिले में अकेली नहीं है। जिले के कई अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्कूल भवनों की स्थिति बदहाल है। उदाहरण के लिए, कोरबा जिला प्रशासन ने हाल ही में जिला खनिज निधि (डीएमएफ) के तहत पोड़ी-उपरोड़ा और करतला विकासखंड के कई गांवों में जर्जर स्कूल भवनों के स्थान पर नए भवनों के निर्माण को मंजूरी दी है। इनमें जामपानी, ठिर्रीआमा, मिसिया, जजगी, और केरहरियापारा जैसे गांव शामिल हैं। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन बगबुडीपारा जैसे कई अन्य स्कूल अभी भी इस सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
    शिक्षा की स्थिति और सरकारी योजनाएं
    छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जैसे सर्व शिक्षा अभियान और डीएमएफ के तहत स्कूल भवनों का निर्माण। फिर भी, ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी हकीकत इन योजनाओं से मेल नहीं खाती। बगबुडीपारा जैसे स्कूलों में सुविधाओं का अभाव और जर्जर भवन बच्चों के शिक्षा के अधिकार को कमजोर कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, बल्कि डिजिटल इंडिया और समावेशी विकास के सरकारी दावों पर भी सवाल उठाती है।
    आवश्यकता: तत्काल कार्रवाई और समाधान
    बगबुडीपारा प्राथमिक शाला की स्थिति को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। निम्नलिखित कदम इस समस्या के समाधान में मदद कर सकते हैं:
    नवीन भवन की स्वीकृति: जिला प्रशासन को डीएमएफ या अन्य योजनाओं के तहत बगबुडीपारा प्राथमिक शाला के लिए नए भवन के निर्माण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
    अस्थायी व्यवस्था: नए भवन के निर्माण तक बच्चों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त स्थान की व्यवस्था की जाए, ताकि पढ़ाई निर्बाध रूप से चल सके।
    नियमित निरीक्षण: शिक्षा विभाग को नियमित रूप से स्कूल भवनों की स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए और जर्जर भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए।
    अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी: स्थानीय समुदाय और अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनकी भागीदारी से समाधान निकाला जाए।

                      ,,निष्कर्ष,,

    बगबुडीपारा प्राथमिक शाला की जर्जर स्थिति और एक छोटे से कमरे में पांच कक्षाओं का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की बदहाल स्थिति का जीवंत उदाहरण है। बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। नवीन भवन की स्वीकृति और पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करना न केवल बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करेगा, बल्कि उनके सपनों को साकार करने में भी मदद करेगा। यह समय केवल आश्वासनों का नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई का है, ताकि बगबुडीपारा के बच्चे सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।

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    विनोद जायसवाल

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