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    Home»Uncategorized»चोटिया परियोजना में आंगनबाड़ी सहायिका नियुक्ति में अनियमितता का आरोप: जनपद अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश,,
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    चोटिया परियोजना में आंगनबाड़ी सहायिका नियुक्ति में अनियमितता का आरोप: जनपद अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश,,

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल19/07/2025
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    चोटिया परियोजना में आंगनबाड़ी सहायिका नियुक्ति में अनियमितता का आरोप: जनपद अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश,,

    कोरबा, 19 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के आकांक्षी ब्लॉक पोंडी उपरोड़ा के चोटिया परियोजना में आंगनबाड़ी सहायिका की नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं।  जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा की अध्यक्ष श्रीमती माधुरी देवी ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर 56 सहायिकाओं की नियुक्ति में अवैध वसूली और भर्ती नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने जिला स्तरीय समिति को जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, चोटिया परियोजना के प्रभारी परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) मनोज अग्रवाल ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया है कि जांच में सारी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुसार होने की पुष्टि हो जाएगी।

    आरोपों का विवरण

    जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा की अध्यक्ष श्रीमती माधुरी देवी ने कलेक्टर को सौंपे गए 11 बिंदुओं के शिकायत पत्र में चोटिया परियोजना में आंगनबाड़ी सहायिका के 76 स्वीकृत पदों में से 56 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया में निम्नलिखित अनियमितताओं का उल्लेख किया है:
    नियमों की अनदेखी: भर्ती प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती नियम 2008 का पालन नहीं किया गया। नियमों के अनुसार, चयन प्रक्रिया 89 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए, लेकिन प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा गया।
    अवैध वसूली: जनपद क्षेत्रों में विभागीय कर्मचारियों, अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा आवेदिकाओं से पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों को जनपद पंचायत की सामान्य सभा में उठाया गया, लेकिन दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    पारदर्शिता का अभाव: परियोजना अधिकारी द्वारा चयन प्रक्रिया के रिकॉर्ड जनपद पंचायत की महिला एवं बाल विकास समिति के साथ साझा नहीं किए गए। समिति द्वारा रिकॉर्ड मांगने पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

    पुरानी BPL सूची का दुरुपयोग: भर्ती नियम 2008 की कंडिका 3.5 और संचालक, महिला एवं बाल विकास, रायपुर के पत्र (15 जनवरी 2021) के अनुसार, सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना 2011 की BPL सूची के आधार पर गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली आवेदिकाओं को 6 अतिरिक्त अंक दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन आरोप है कि कुछ मामलों में पुरानी 2002 की BPL सूची का उपयोग किया गया, जो भर्ती के लिए मान्य नहीं है।

    प्रक्रिया में देरी: 76 पदों में से 56 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन शेष 20 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया लंबित है। इसके कारणों का खुलासा नहीं किया गया।

    मुनादी और आवेदन प्रक्रिया में अनियमितता: नियमों के अनुसार, रिक्त पदों की सूचना ग्राम पंचायतों में मुनादी के माध्यम से दी जानी चाहिए। लेकिन मुनादी प्रभार पत्रों की जांच नहीं की गई। साथ ही, प्राप्त आवेदनों की पंजी, आवेदन खोलने की प्रक्रिया, और मूल्यांकन समिति की बैठक के रिकॉर्ड में पारदर्शिता का अभाव रहा।

    दावा-आपत्ति निराकरण में लापरवाही: दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में प्राप्त आपत्तियों का समयबद्ध निराकरण नहीं किया गया। निराकरण पत्रक और शेष आपत्तियों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

    कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

    श्रीमती माधुरी देवी ने कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में इन 11 बिंदुओं पर जिला स्तरीय समिति से विस्तृत जांच की मांग की है। शिकायत की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ), महिला एवं बाल विकास, रेणु प्रकाश ने बताया कि कलेक्टर के निर्देशानुसार शीघ्र ही बिंदुवार जांच शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले इस मामले में कुछ कहना उचित नहीं होगा।

    सीडीपीओ का पक्ष: शिकायत निराधार

    चोटिया परियोजना के प्रभारी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा, “चयन प्रक्रिया में चार अधिकारियों की समिति शामिल थी, और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुसार हुई है। जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। यह मुझे बदनाम करने की साजिश है।” अग्रवाल ने यह भी दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई है और सभी निर्णय समिति द्वारा सामूहिक रूप से लिए गए हैं।

    पोंडी उपरोड़ा में पहले भी सामने आईं शिकायतें

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें कोरबा जिले में कोई नई बात नहीं हैं। पिछले एक साल में पोंडी उपरोड़ा, बरपाली, और कोरबा ग्रामीण परियोजनाओं में भी ऐसी शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों का प्रमुख कारण विभाग में स्थायी अधिकारियों की कमी और प्रभार वाली प्रथा को माना जा रहा है।
    वर्तमान में कोरबा जिले की 10 परियोजनाओं में से कई परियोजनाएँ परियोजना अधिकारी विहीन हैं:
    पसान और चोटिया परियोजना: दोनों परियोजनाएँ वर्तमान में अधिकारी विहीन हैं। पसान का अतिरिक्त प्रभार पोंडी उपरोड़ा की परियोजना अधिकारी श्रीमती निशा कंवर के पास है, जबकि चोटिया का प्रभार कोरबा शहरी परियोजना के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल देख रहे हैं,

    करतला परियोजना: 30 जुलाई 2025 के बाद परियोजना अधिकारी श्रीमती रागिनी बैस के सेवानिवृत्त होने से यह परियोजना भी रिक्त हो जाएगी।

    मनोज अग्रवाल को जल्द ही जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति मिलने वाली है, जिसके बाद प्रभार वाली प्रथा और अधिक प्रभावित कर सकती है। इस प्रथा के कारण विभागीय कामकाज की प्रगति, गुणवत्ता, और प्रशासनिक नियंत्रण पर असर पड़ रहा है।

    11 बिंदुओं पर जांच की मांग

    जनपद अध्यक्ष द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है:
    लिपिकीय शाखा प्रभारी और शाखा आबंटन की जांच।
    ग्राम पंचायतों में मुनादी प्रभार पत्रों की जांच।
    प्राप्त आवेदनों की पंजी और आवेदन खोलने की प्रक्रिया की जांच।

    केंद्रवार प्राप्त आवेदनों की संख्या और सभी आवेदन पत्रों की जांच। मूल्यांकन समिति की बैठक और पंजी की जांच।
    प्रावधिक मूल्यांकन पत्र और दावा-आपत्ति की अवधि की जांच।
    दावा-आपत्ति के निराकरण और शेष आपत्तियों की स्थिति की जांच।
    अनंतिम मूल्यांकन पत्रक की तारीख और सामग्री की जांच।
    गरीबी रेखा सूची 2011 के आधार पर 6 अतिरिक्त अंकों के आवंटन और 2002 की सूची के दुरुपयोग की जांच।
    पंचायत चुनाव से पहले अनुमोदन के लिए समिति की बैठक और पत्रों की जांच।

    शेष 20 पदों पर नियुक्ति में देरी के कारणों और 89 दिनों की समय-सीमा का उल्लंघन की जांच।

    प्रभार वाली प्रथा: एक गंभीर समस्या
    महिला एवं बाल विकास विभाग में स्थायी परियोजना अधिकारियों की कमी एक दीर्घकालिक समस्या बन गई है। प्रभार वाली प्रथा के कारण न केवल प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर हो रहा है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया और अन्य विभागीय कार्यों में भी पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक ऐसी शिकायतें और अनियमितताएँ सामने आती रहेंगी।
    संभावित प्रभाव
    यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो चोटिया परियोजना में 56 सहायिकाओं की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द हो सकती है, और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर सकता है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण, स्वास्थ्य, और प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएँ इन सेवाओं की प्रभावशीलता को कमजोर कर सकती हैं।

                                 ,,,निष्कर्ष,,

    चोटिया परियोजना में आंगनबाड़ी सहायिका नियुक्ति में लगे अनियमितता के आरोप गंभीर हैं और महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं। जनपद अध्यक्ष श्रीमती माधुरी देवी की शिकायत और कलेक्टर द्वारा जांच के आदेश इस मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं। सीडीपीओ मनोज अग्रवाल के दावे के बावजूद, जांच के परिणाम ही यह स्पष्ट करेंगे कि क्या प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या इसमें अनियमितताएँ थीं। शासन को इस मामले में त्वरित और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रभार वाली प्रथा को समाप्त करने और स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति पर ध्यान देना होगा। यह न केवल प्रशासनिक सुधार के लिए, बल्कि आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता और जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।
    स्रोत:  जन-जन की आवाज न्यूज़, कोरबा, और जनपद अध्यक्ष के शिकायत पत्र से प्राप्त जानकारी।

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