कोरबा के राजमहल में मिली ऐतिहासिक धरोहर: ज्ञानभारतम् मिशन के सर्वेक्षण में 16वीं शताब्दी की 400 वर्ष पुरानी कल्चुरीकालीन पांडुलिपियाँ बरामद,,
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञानभारतम् मिशन (राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान) के तहत छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सफलता हाथ लगी है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के कुशल मार्गदर्शन में जिले की भारतीय ज्ञान परंपरा और अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण व दस्तावेजीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
इसी सुनियोजित अभियान के दौरान, कोरबा के पुरानी बस्ती (रानी रोड) स्थित ऐतिहासिक राजमहल ‘राजगढ़ी’ से कल्चुरीकाल की लगभग 400 वर्ष पुरानी और 16वीं शताब्दी की हस्तलिखित पांडुलिपियों की खोज की गई है।
राजपरिवार की संदूक से 20 साल बाद निकलीं अमूल्य कड़ियाँ
ज्ञानभारतम् मिशन के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह के नेतृत्व में 23 मई 2026 को किए गए एक विशेष सर्वेक्षण में यह सफलता मिली। यह दुर्लभ और अमूल्य धरोहर कोरबा की अंतिम शासिका स्वर्गीय रानी धनराज कुंवर देवी के नाती, कुमार रविभूषण प्रताप सिंह (उम्र 67 वर्ष) के निवास स्थान पर सुरक्षित पाई गई।
स्व. रानी धनराज कुंवर देवी और स्व. जोगेश्वर प्रताप सिंह के पूर्वजों द्वारा पीढ़ियों से सहेज कर रखी गई इन पांडुलिपियों को अत्यंत जर्जर अवस्था के कारण बीते लगभग 20 वर्षों से खोला नहीं गया था। कागज़ इतने पुराने और जीर्ण हो चुके हैं कि छूने मात्र से टूटने लगते हैं। यही वजह थी कि इन्हें लंबे समय से एक लाल कपड़े में लपेटकर पूजा घर में अत्यंत श्रद्धा के साथ सुरक्षित रखा गया था। राजपरिवार के समय में इन पांडुलिपियों का उपयोग बड़े धार्मिक आयोजनों और कथा वाचन के लिए किया जाता था।
’ज्ञानभारतम् ऐप’ के जरिए किया गया डिजिटल संरक्षण
सर्वेक्षण दल को मौके पर श्रीमद्भागवत पुराण और सुखसागर (बारहवां स्कंध) सहित धार्मिक, आध्यात्मिक तथा ऐतिहासिक महत्व की कुल 27 प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियाँ प्राप्त हुईं।
विशेषता: मोटे पुराने कागज़ पर काली स्याही से देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा में ये पांडुलिपियाँ हाथ से लिखी गई हैं।
डिजिटलीकरण: जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने बिना समय गंवाए मौके पर ही “ज्ञानभारतम् ऐप” के माध्यम से इन सभी 27 पांडुलिपियों की तस्वीरें अपलोड कीं और उनका डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित किया।
विशेषज्ञ मत: इस खोज की ऐतिहासिक प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ इतिहासकार एवं भाषाविद डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र (रायपुर) से दूरभाष पर संपर्क किया गया। डॉ. मिश्र द्वारा दी गई प्रामाणिक ऐतिहासिक जानकारियों और संदर्भों को भी ऐप में डेटा के रूप में सुरक्षित कर लिया गया है।
ब्रिटिश काल की 300 पृष्ठों की दुर्लभ ‘स्कंध पुराण’ भी मिली
इस सर्वेक्षण में केवल हस्तलिखित पांडुलिपियाँ ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी शासनकाल का भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मिला है। राजपरिवार के संग्रह से 19वीं शताब्दी में कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) के छापाखाने (प्रिंटिंग प्रेस) से प्रकाशित ‘स्कंध पुराण’ की एक ऐतिहासिक प्रति मिली है। लगभग 300 पृष्ठों की यह मुद्रित प्रति भी वर्तमान में बेहद जर्जर अवस्था में है, जिसे सुरक्षित करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सहेज लिया गया है।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हुआ इतिहास
”ज्ञानभारतम् मिशन के माध्यम से कोरबा के पुराने राजपरिवार में सदियों से सुरक्षित इन दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियों का अब राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखीकरण हो चुका है। डिजिटल स्वरूप में आने के बाद अब यह अमूल्य ऐतिहासिक कड़ियाँ नष्ट होने से बच जाएंगी और शोधार्थियों समेत भावी पीढ़ियों के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा के एक गौरवशाली हिस्से के रूप में हमेशा उपलब्ध रहेंगी।”