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    कटघोरा शहर लिथियम खदान से अप्रभावित: जनता को राहत, गोड़मा नाला के उस पार जंगल और सरकारी जमीन खदान के दायरे में,,

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल15/08/2025
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    कटघोरा शहर लिथियम खदान से अप्रभावित: जनता को राहत, गोड़मा नाला के उस पार जंगल और सरकारी जमीन खदान के दायरे में,,

     

    कोरबा-कटघोरा, 15 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा-पोड़ी क्षेत्र में देश के पहले लिथियम खनिज भंडार की खोज ने क्षेत्र में एक नई उम्मीद और चर्चा को जन्म दिया था। इस खनिज भंडार के खनन का अनुबंध मैकी साउथ नामक कंपनी को दिया गया है, और इसका कुल क्षेत्रफल 256.12 हेक्टेयर है। शुरुआती दौर में इस खदान के दायरे में कटघोरा शहर और आसपास के कई गांवों के प्रभावित होने की आशंका ने स्थानीय लोगों में चिंता पैदा कर दी थी। लेकिन अब ताजा जानकारी और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त नक्शे ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है, जिससे कटघोरा शहरवासियों और आसपास के निवासियों को बड़ी राहत मिली है।

     

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    ,,लिथियम खदान की शुरुआती,,

    आशंकाएं और भ्रांतियां
    जब कटघोरा ब्लॉक के ग्राम महेशपुर इलाके में लिथियम और अन्य रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) के भंडार की खोज की खबर सामने आई थी, तो यह अनुमान लगाया गया था कि महेशपुर, नवागांव, झाबुकला, रामपुर जैसे गांव और कटघोरा शहर का कुछ हिस्सा इस खदान के दायरे में आ सकता है। इस खबर ने न केवल स्थानीय लोगों में विस्थापन का भय पैदा किया, बल्कि भविष्य में भूमि अधिग्रहण की आशंका के चलते क्षेत्र में जमीनों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर प्रशासन ने रोक लगा दी थी।
    इस दौरान कुछ लोगों ने मुआवजे की राशि को बढ़ाने की मंशा से जमीनों का बटवारा और छोटे-छोटे टुकड़ों में रजिस्ट्री कराना शुरू कर दिया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि भविष्य में अधिग्रहण होने पर उन्हें अधिक मुआवजा मिल सके। हालांकि, इस प्रक्रिया ने क्षेत्र में अनिश्चितता और भय का माहौल और गहरा कर दिया था।

    ,,नक्शे ने बदली तस्वीर: कटघोरा शहर सुरक्षित,,

    सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए दस्तावेजों और खदान क्षेत्र के नक्शे ने अब स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। नक्शे के अनुसार, कटघोरा शहर का कोई भी हिस्सा लिथियम खदान के दायरे में नहीं आ रहा है। खदान का क्षेत्र मुख्य रूप से गोड़मा नाला के उस पार जंगल और सरकारी (वन व राजस्व) भूमि तक सीमित है। नक्शे से यह भी स्पष्ट हुआ है कि खदान के सीमावर्ती क्षेत्र में ग्राम घरीपखना, घुंचापुर, और नवापारा के कुछ हिस्से आ सकते हैं, लेकिन प्रभावित क्षेत्र बहुत सीमित है।
    नक्शे के अनुसार, खदान के लिए लगभग 70 से 80 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण संभावित है, जबकि शेष क्षेत्र में जंगल और सरकारी जमीन शामिल है। यह जानकारी उन लोगों के लिए निराशाजनक हो सकती है, जो मुआवजे की उम्मीद में जमीनों का बटवारा या रजिस्ट्री करा रहे थे।

    ,,स्थानीय लोगों को राहत, प्रशासन से मांग,,

    नक्शे के सामने आने के बाद कटघोरा शहर और आसपास के गांवों के निवासियों ने राहत की सांस ली है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि न तो कटघोरा शहर और न ही आसपास के प्रमुख गांवों को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा। इस खबर ने क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनाया है, और लोग अब सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
    स्थानीय निवासियों ने अब प्रशासन से मांग की है कि खदान के दायरे में शहर और प्रमुख गांवों के न आने की पुष्टि होने के बाद जमीनों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर लगी रोक को हटाया जाए। उनका कहना है कि जब खदान का कोई प्रभाव शहर और आसपास के क्षेत्रों पर नहीं पड़ रहा है, तो इस तरह की पाबंदी को बनाए रखना अनुचित है।

    ,,लिथियम खदान का महत्व और भविष्य,,

    कटघोरा में मिला लिथियम खनिज भंडार देश के लिए एक महत्वपूर्ण खोज है, क्योंकि लिथियम का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, सौर ऊर्जा भंडारण, और अन्य हाई-टेक उद्योगों में होता है। यह खदान न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। मैकी साउथ कंपनी को इस खदान के खनन का अनुबंध मिलना क्षेत्र में औद्योगिक विकास की संभावनाओं को और बढ़ाता है।
    हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि खनन प्रक्रिया पर्यावरण के लिए हानिकारक न हो और स्थानीय समुदाय के हितों का ध्यान रखा जाए। खनन क्षेत्र में शामिल होने वाली 70-80 एकड़ कृषि भूमि के मालिकों को उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था की मांग भी उठ रही है।

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    विनोद जायसवाल

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