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    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल23/07/2025
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    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हरेली पर्व पर दी शुभकामनाएँ: छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और प्रकृति प्रेम का प्रतीक,,

    रायपुर, 23 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के परंपरागत लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई दी है। हरेली, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और कृषि परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, को लेकर मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश की मिट्टी, संस्कृति और प्रकृति प्रेम से जोड़ते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने हरेली को न केवल एक उत्सव, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों से वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाने की अपील भी की।
    हरेली पर्व: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर
    हरेली छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख लोकपर्व है, जो सावन मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है और इसे छत्तीसगढ़ में कृषि वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री साय ने अपने संदेश में कहा, “हरेली छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ा एक ऐसा पर्व है, जो हमारी कृषि संस्कृति, लोक परंपरा और प्रकृति के प्रति प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है, बल्कि यह हमें हमारी जड़ों और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव की याद दिलाता है।”
    हरेली के दिन किसान अपने कृषि उपकरणों, जैसे हल, कुदाल, और अन्य औजारों की पूजा करते हैं और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह पर्व अच्छी फसल और समृद्धि की कामना का अवसर होता है। साथ ही, यह प्रकृति के साथ सामंजस्य और संतुलन की भावना को भी प्रोत्साहित करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन गेड़ी नृत्य, लोकगीत, और पारंपरिक खेलों का आयोजन होता है, जो छत्तीसगढ़ की जीवंत संस्कृति को और भी रंगीन बनाता है।
    मुख्यमंत्री का संदेश: पर्यावरण संरक्षण और सौहार्द
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हरेली पर्व को और सार्थक बनाने के लिए प्रदेशवासियों से विशेष आग्रह किया। उन्होंने कहा, “इस वर्ष हम हरेली को केवल परंपराओं तक सीमित न रखें, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बनाएं। धरती माता की पूजा के साथ-साथ वृक्षारोपण करें, ताकि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा और स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित कर सकें।” यह अपील छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति बढ़ती चिंताओं के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
    श्री साय ने यह भी आह्वान किया कि हरेली पर्व को आपसी सौहार्द, प्रेम और परंपराओं के सम्मान के साथ मनाया जाए। उन्होंने कहा, “यह पर्व हमें एकजुटता और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है। आइए, हम इस अवसर पर अपने समुदायों को और मजबूत करें और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाएं।”
    हरेली का महत्व: कृषि और प्रकृति का संगम
    हरेली छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है। यह पर्व सावन मास में वर्षा ऋतु की शुरुआत के साथ मनाया जाता है, जब खेतों में बुवाई का कार्य शुरू होता है। इस दिन किसान अपने खेतों और औजारों की पूजा करते हैं और अच्छी वर्षा, फसल, और समृद्धि की कामना करते हैं। गायों और बैलों की भी विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि ये कृषि कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    इसके अलावा, हरेली पर्व में कई पारंपरिक रीति-रिवाज और उत्सव शामिल होते हैं। गेड़ी (बांस की लकड़ी पर चलने का खेल), लोकनृत्य, और छत्तीसगढ़ी व्यंजन इस पर्व की शोभा बढ़ाते हैं। गाँवों में बच्चे और युवा गेड़ी पर चढ़कर प्रतियोगिताएँ आयोजित करते हैं, जो उत्साह और उमंग का प्रतीक है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक एकता को भी दर्शाता है।
    मुख्यमंत्री की अपील का संदर्भ
    मुख्यमंत्री का वृक्षारोपण का आह्वान हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बढ़ते प्रयासों का हिस्सा है। कोरबा और रायगढ़ जैसे जिलों में औद्योगीकरण और खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए, वृक्षारोपण और हरियाली को बढ़ावा देना समय की मांग है। कटघोरा में हाल ही में हुए प्रदर्शन और कोरबा में भू-विस्थापितों के आंदोलन जैसे मुद्दों के बीच, हरेली पर्व का यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है, क्योंकि यह प्रकृति और मानव के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
    मुख्यमंत्री का यह संदेश कोरबा जिले में हाल की घटनाओं, जैसे SECL कुसमुंडा क्षेत्र में भू-विस्थापित महिलाओं के अर्धनग्न प्रदर्शन और कटघोरा में कांग्रेस के चक्काजाम, के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। ये घटनाएँ सामाजिक और पर्यावरणीय असंतुलन को दर्शाती हैं, और हरेली जैसे पर्व समाज को एकजुट करने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करते हैं।
    प्रदेशवासियों के लिए शुभकामनाएँ
    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में आशा व्यक्त की कि हरेली पर्व प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और हरियाली लाएगा। उन्होंने कहा, “हरेली का यह पावन पर्व छत्तीसगढ़ के हर घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। यह पर्व हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी याद दिलाता है।” उन्होंने सभी नागरिकों से इस पर्व को उत्साह और एकता के साथ मनाने का आह्वान किया।
    हरेली और छत्तीसगढ़ की पहचान
    हरेली पर्व छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा है। यह न केवल किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, बल्कि यह शहरी और ग्रामीण समुदायों को भी एक साथ लाता है। इस दिन लोग अपने घरों में पारंपरिक व्यंजन, जैसे ठेठरी-खुरमी, चीला, और बरा, बनाते हैं और सामुदायिक उत्सवों में भाग लेते हैं। यह पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है,

                        ,,निष्कर्ष,,

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का हरेली पर्व पर दिया गया संदेश छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर, पर्यावरण संरक्षण, और सामाजिक एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हरेली पर्व, जो कृषि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, छत्तीसगढ़वासियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री की वृक्षारोपण की अपील और सामाजिक सौहार्द का आह्वान इस पर्व को और भी सार्थक बनाता है।
    कोरबा और रायगढ़ जैसे जिलों में हाल की घटनाओं, जैसे भू-विस्थापन, सामाजिक तनाव, और पर्यावरणीय चुनौतियों, के बीच हरेली पर्व एक अवसर है, जो समाज को एकजुट करने और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में प्रेरित करता है। यह पर्व न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक हरित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की नींव रखने का भी संदेश देता है।

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    विनोद जायसवाल

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