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वेतन सरकार से, ,,, वसूली किसानों से ? पटवारी व्यवस्था पर भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल! ,, कोरबा में पटवारी मिथलेश वर्मा निलंबित, बिलासपुर में ₹25 हजार लेते वायरल वीडियो के बाद ऋषिपुरी गोस्वामी पर भी गिरी गाज,,
एक ओर एग्रीस्टेक के कार्य से अनुपस्थित रहने पर निलंबन, दूसरी ओर जमीन के बंटवारे के नाम पर कथित रिश्वतखोरी का वीडियो! क्या किसानों के राजस्व संबंधी काम अब बिना कथित लेन-देन के पूरे नहीं होंगे ?
कोरबा/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग में पटवारियों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोरबा जिले में शासकीय कार्यों में लापरवाही और लगातार अनुपस्थिति के मामले में पटवारी मिथलेश वर्मा को निलंबित किए जाने की खबर सामने आई है। वहीं बिलासपुर जिले में जमीन के बंटवारे के नाम पर 25 हजार रुपये लेते हुए एक पटवारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने संबंधित पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी को भी निलंबित कर दिया है।
दोनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन इन घटनाओं ने राजस्व विभाग की जवाबदेही और किसानों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
कोरबा में लापरवाही पर प्रशासन की कार्रवाई
कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तहसील दर्री में पदस्थ पटवारी मिथलेश वर्मा को शासकीय कार्यों में लापरवाही और लगातार अनुपस्थिति के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। इस कार्रवाई को शासकीय जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
बिलासपुर में 25 हजार रुपये का कथित लेन-देन, वीडियो वायरल होने पर निलंबन
इधर बिलासपुर जिले के पचपेड़ी तहसील क्षेत्र से सामने आए एक वायरल वीडियो ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वीडियो में पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी जमीन के बंटवारे और राजस्व संबंधी कार्य के नाम पर रुपये लेते तथा अतिरिक्त रकम की चर्चा करते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जमीन बंटवारे के लिए 50 हजार रुपये की मांग किए जाने का आरोप है और 25 हजार रुपये देते समय वीडियो रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद तहसीलदार पचपेड़ी की जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए। इसके आधार पर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 29 अक्टूबर 2026 को संबंधित पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही सात दिनों के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो लगभग एक वर्ष पुराना है, लेकिन इसके सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई हुई।
किसानों का सवाल—आखिर राजस्व काम के लिए कितने चक्कर लगाएं?
किसानों और आम भू-स्वामियों के लिए नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, नक्शा दुरुस्ती, खसरा सुधार और ऑनलाइन रिकॉर्ड में संशोधन जैसे कार्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इन कार्यों के लिए उन्हें पटवारी कार्यालय और राजस्व अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
यदि कहीं इन शासकीय सेवाओं के बदले अवैध रकम मांगने की शिकायतें सामने आती हैं, तो यह केवल किसी एक कर्मचारी का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
सरकार कर्मचारियों को नियमित वेतन और सुविधाएं इसलिए देती है ताकि वे जनता की सेवा करें, न कि शासकीय दायित्वों के बदले किसी नागरिक से अवैध राशि की अपेक्षा करें। पटवारी का पद किसानों की जमीन और उनके अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है। इस पद पर बैठे प्रत्येक कर्मचारी से निष्पक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है।
आंदोलन की आड़ में जवाबदेही से बचने की छूट नहीं मिलनी चाहिए
राजस्व कर्मचारियों की अपनी मांगें और समस्याएं हो सकती हैं। आंदोलन करना उनका अधिकार है, लेकिन शासकीय व्यवस्था में पारदर्शिता, ऑनलाइन तकनीक और जवाबदेही की मांग का विरोध करके जनता को परेशानी में डालना उचित नहीं हो सकता।
यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, रिकॉर्ड में छेड़छाड़ अथवा किसानों की जमीन से संबंधित अनियमितताओं की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी जरूरी है।
सरकार से उठती मांग—राजस्व विभाग में जवाबदेही तय हो
अब आवश्यकता है कि शासन और जिला प्रशासन राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा करें। पटवारी कार्यालयों में लंबित प्रकरणों की निगरानी हो, ऑनलाइन आवेदनों की समय-सीमा तय हो, रिश्वत मांगने की शिकायतों पर त्वरित जांच हो और किसानों को उनके काम की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिले।
किसानों की जमीन कोई सौदेबाजी का माध्यम नहीं है। पटवारी का पद जनता की सेवा और राजस्व व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के लिए है, न कि किसी प्रकार की अवैध वसूली का अधिकार।
जनता का सीधा सवाल है—क्या किसानों को अपनी ही जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और अधिकार प्राप्त करने के लिए रिश्वत देनी पड़ेगी? अब समय आ गया है कि राजस्व विभाग में ईमानदार कर्मचारियों का सम्मान और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।













