पोड़ी उपरोड़ा के वनांचल में सहकारिता का विस्तार: सि. नवापारा और परला में नवीन समितियों का भव्य आगाज़
कटघोरा/कोरबा: कोरबा जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के सीमावर्ती क्षेत्रों में सहकारिता आंदोलन को मजबूती देते हुए ग्राम सि. नवापारा और परला में नवीन आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों का उद्घाटन समारोह गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री ने किया वर्चुअल लोकार्पण, विधायक रहे मुख्य अतिथि
15 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल माध्यम से नवीन भवन का लोकार्पण कर किसानों को बड़ी सौगात दी। वहीं, ग्राम सि. नवापारा (पंजीयन क्रमांक 382) में आयोजित भौतिक समारोह में क्षेत्रीय विधायक (पाली-तानाखार) तुलेश्वर मरकाम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
“सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इन नवीन समितियों के माध्यम से किसानों को खाद, बीज और ऋण जैसी सुविधाओं के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा, जिससे वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे।” > — तुलेश्वर मरकाम, विधायक
कार्यक्रम में गणमान्य जनों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- विद्वान सिंह मरकाम: जिला पंचायत सदस्य एवं जिला अध्यक्ष (गोंडवाना गणतंत्र पार्टी)।
- विभागीय अधिकारी: उप पंजीयक एम.आर. ध्रुव, सहकारिता निरीक्षक एस.के. चौहान, पर्यवेक्षक मणिशंकर मिश्रा और समिति प्रबंधक आनंद कौशिक।
- स्थानीय नेतृत्व: सि. नवापारा सरपंच श्रीमती रीता कृष्ण कुमार, सिमगा सरपंच गायत्री आयम, घोसरा सरपंच मनोहर बाई बिंझवार, जाम कछार सरपंच प्रमिला बाई एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष सोहन सिंह कोराम।
परला में भी सहकारिता को मिली नई ऊर्जा
सि. नवापारा के साथ-साथ ग्राम पंचायत परला में भी नवीन सेवा सहकारी समिति का शुभारंभ किया गया। इस दौरान कोरबी, चोटिया और मोरगा क्षेत्र के समिति प्रबंधकों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद रहे। वक्ताओं ने जोर दिया कि इन समितियों के खुलने से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और किसानों को उनकी उपज का सही लाभ मिल सकेगा।
ग्रामीण विकास की नई राह
इन नवीन समितियों की स्थापना से पोड़ी उपरोड़ा के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को अब बैंकिंग और कृषि संबंधी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी होगी। इसे क्षेत्र के विकास और किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

