वेदांता पावर प्लांट भीषण हादसा: 20 श्रमिकों की मौत, चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 19 अधिकारियों पर FIR दर्ज
सक्ती/छत्तीसगढ़: वेदांता पावर प्लांट में हुए हृदयविदारक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी और उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में हुए इस विस्फोट में अब तक 20 जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी हैं। इस मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 वरिष्ठ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ डभरा थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
जांच में बड़ा खुलासा: सुरक्षा से समझौता बना मौत की वजह
औद्योगिक सुरक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
- ओवरलोडिंग: उत्पादन को दोगुना करने के फेर में बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से सीधे 590 मेगावाट कर दिया गया।
- चेतावनी की अनदेखी: सिस्टम में तकनीकी खराबी और खतरे के संकेतों के बावजूद काम को नहीं रोका गया।
- लापरवाही: जल्दबाजी और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के कारण सिस्टम का संतुलन बिगड़ा और भीषण विस्फोट हुआ।
मृतकों और घायलों का विवरण
- कुल मौतें: 20 श्रमिक (4 छत्तीसगढ़ से, शेष यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से)।
- घायल: 36 लोग झुलसे, जिनमें से 16 का उपचार विभिन्न अस्पतालों में जारी है।
मुआवजे की घोषणा और सरकारी कार्रवाई
हादसे की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार सहित कंपनी प्रबंधन ने मुआवजे का ऐलान किया है:
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- मुख्यमंत्री राहत: ₹5 लाख (मृतक परिजन) और ₹50 हजार (घायल)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
- PMO (PMNRF): ₹2 लाख (मृतक परिजन) और ₹50 हजार (घायल)।
- वेदांता ग्रुप: ₹35 लाख (मृतक परिजन) और ₹15 लाख (घायल)।
“प्रबंधन की गंभीर लापरवाही के आधार पर डभरा थाने में केस दर्ज किया गया है। दोषियों के खिलाफ कानून सम्मत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” — प्रफुल्ल ठाकुर, एसपी, सक्ती
