छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों को दिखा रहे ठेगा, सरकार को बदनाम करने की हो रही साजिश,एग्री स्टेक और फार्मर आईडी अनुमोदन में लापरवाही: किसानों की बढ़ती परेशानी और अधिकारियों की मनमानी पर बड़ा सवाल,,
कोरबा कटघोरा 29- 10 -2026-छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत सुदूर ग्रामीण इलाकों में किसान एग्री स्टेक फारमर आई डी और धान पंजीयन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। एक तरफ जहां धान पंजीयन की अंतिम तिथि नजदीक है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय राजस्व अधिकारियों की उदासीनता और कथित साजिश के चलते किसानों को भारी मानसिक और आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरी समस्या और किसानों के आक्रोश को निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
1. फार्मर आईडी और खसरा अनुमोदन में टालमटोल
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दूरदराज के ग्रामीण इलाकों के किसान धान खरीदी केंद्र और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश हैं।
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खाद्य विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कि खसरा अनुमोदन का कार्य संबंधित तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक (RI) की आईडी से होना है, अधिकारी इसे टाल रहे हैं।
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अधिकारियों द्वारा यह कहकर किसानों को बरगलाया जा रहा है कि मामला पटवारी की आईडी में लंबित है, जबकि इसमें मात्र 1 मिनट से भी कम समय लगता है। इसके बावजूद 3-4 दिनों तक अनुमोदन नहीं किया जा रहा है।
2. पटवारी आंदोलन का खुला समर्थन और सरकार की छवि धूमिल करने की साजिश
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स्थानीय किसानों और आम नागरिकों का आरोप है कि पोड़ी उपरोड़ा तहसील के अंतर्गत ग्राम कोरबी के राजस्व अधिकारी/आरआई (भगत जी) खुलेआम पटवारी आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
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हड़ताल पर जाने से पहले जानबूझकर किसानों की फार्मर आईडी से खसरा नंबर डिलीट करने या उन्हें अटकाए रखने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
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जानकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सब वर्तमान सरकार की छवि को धूमिल करने और जनता के मन में आक्रोश पैदा करने की एक गहरी साजिश है।
3. राजस्व विभाग की लचर कार्यशैली और किसानों का शोषण
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छत्तीसगढ़ के सरकारी महकमों में इस समय राजस्व विभाग सबसे अधिक लचर और उदासीन बना हुआ है।
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किसान फौती, सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे जैसे अपने छोटे-छोटे और बुनियादी कानूनी कामों के लिए सालों से तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
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इन जनविरोधी हरकतों के कारण आम जनता में सरकार के प्रति नकारात्मक संदेश जा रहा है, जिसका सीधा खामियाजा शासन-प्रशासन को भुगतना पड़ रहा है।
4. कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की प्रमुख मांगें
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किसानों के सिर पर पहले से ही खाद, बीज और अन्य कृषि कार्यों का लाखों रुपये का कर्ज है, ऊपर से पंजीयन की अंतिम तिथि (31 अक्टूबर) सिर पर होने के कारण उनकी चिंताएं कई गुना बढ़ गई हैं।
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मुख्य मांग: किसानों और विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि धान पंजीयन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 10 नवंबर किया जाए।
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सख्त कार्रवाई की मांग: किसानों ने चेतावनी दी है कि ऐसे जनहित विरोधी, लापरवाह और साजिशकर्ता अधिकारियों को तुरंत चिन्हित कर िनलंबित (सस्पेंड) किया जाए, ताकि अन्नदाताओं को समय पर उनका अधिकार मिल सके।
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अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी किसानों की इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए कब तक सख्त कदम उठाते हैं और इन लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।













