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    एग्रीस्टैक फार्मर आईडी के अनुमोदन में देरी से किसान परेशान, तहसील कार्यालय और धान खरीदी केंद्र के चक्कर काटने को मजबूर किसानों ने 10 नवंबर तक पंजीयन की अवधि बढ़ाने की उठाई मांग, राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल,,

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल28/10/2026
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    एग्रीस्टैक फार्मर आईडी के अनुमोदन में देरी से किसान परेशान, तहसील कार्यालय और धान खरीदी केंद्र के चक्कर काटने को मजबूर
    किसानों ने 10 नवंबर तक पंजीयन की अवधि बढ़ाने की उठाई मांग, राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल,,

    कोरबा-कटघोरा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में एग्रीस्टैक फार्मर आईडी और खसरा नंबरों के अनुमोदन को लेकर किसान गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। किसान अपनी फार्मर आईडी में संलग्न खसरा नंबरों का अनुमोदन कराने के लिए कभी धान खरीदी केंद्र तो कभी तहसील कार्यालय का चक्कर काटने को मजबूर हैं। किसानों की समस्या का समय पर समाधान नहीं होने से उनमें नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है।

    धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन की अंतिम तिथि नजदीक होने के बीच यह समस्या और गंभीर हो गई है। ऐसे में किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि फार्मर आईडी में लंबित खसरा नंबरों का अनुमोदन जल्द कराया जाए तथा किसान पंजीयन की अवधि बढ़ाकर 10 नवंबर तक की जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान धान बेचने के अधिकार से वंचित न रह जाए।

    1. अनुमोदन को लेकर किसानों को अलग-अलग जानकारी मिलने का आरोप,,

    किसानों के अनुसार, जब वे फार्मर आईडी में संलग्न खसरा नंबरों के अनुमोदन के संबंध में तहसीलदार एवं राजस्व निरीक्षक (आरआई) से संपर्क करते हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि संबंधित खसरा पटवारी की आईडी से सीआईडी अथवा संबंधित सिस्टम में अनुमोदन के लिए भेजा गया है और उनके स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं है।
    वहीं, किसानों को खाद्य विभाग की ओर से यह जानकारी मिलने की बात कही जा रही है कि अनुमोदन के लिए प्रकरण संबंधित तहसीलदार एवं राजस्व निरीक्षक की आईडी में सिस्टम के माध्यम से भेजे जा रहे हैं।
    इस प्रकार अलग-अलग स्तरों से अलग-अलग जानकारी मिलने के कारण किसान असमंजस में हैं। किसानों का कहना है कि जब तक संबंधित विभाग और अधिकारी स्पष्ट जानकारी नहीं देंगे, तब तक वे अपनी समस्या का समाधान कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटते रहेंगे।

    2. तीन-चार दिन से लंबित अनुमोदन पर सवाल

    किसानों का कहना है कि फार्मर आईडी में खसरा नंबरों का अनुमोदन तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना है, लेकिन इसके बावजूद कई प्रकरण तीन-चार दिनों से लंबित पड़े हुए हैं।
    किसानों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब संबंधित अधिकारी की आईडी में अनुमोदन के लिए प्रकरण उपलब्ध हैं, तो समय रहते उनका निराकरण क्यों नहीं किया जा रहा है।

    प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि लंबित प्रकरणों में तकनीकी समस्या है, कर्मचारियों की कमी है या अनुमोदन की प्रक्रिया में किसी अन्य प्रकार की बाधा आ रही है। इससे किसानों को वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिल सकती है।

    3. पटवारी आंदोलन के बीच किसानों की परेशानी बढ़ी

    राजस्व विभाग के कर्मचारियों के आंदोलन के बीच फार्मर आईडी और खसरा अनुमोदन से संबंधित समस्याओं को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों के बीच यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि आंदोलन के कारण आवश्यक राजस्व सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
    कुछ लोगों का आरोप है कि पटवारी आंदोलन से पहले फार्मर आईडी में दर्ज खसरा नंबर और रकबे से संबंधित जानकारी में बदलाव या विलोपन होने से किसानों को परेशानी हुई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

    ऐसे मामलों में प्रशासन को डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन किसानों के रिकॉर्ड में बदलाव हुआ, बदलाव किस स्तर पर हुआ और उसके पीछे क्या कारण था। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    4. क्या किसानों को तकनीकी प्रक्रिया के नाम पर भटकना पड़ रहा है?

    किसानों का आरोप है कि अनुमोदन की जिम्मेदारी को लेकर संबंधित कार्यालयों में स्पष्टता नहीं होने के कारण उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजा जा रहा है। किसान चाहते हैं कि प्रशासन यह निर्धारित करे कि फार्मर आईडी में संलग्न खसरा नंबरों के अनुमोदन की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और लंबित मामलों का निराकरण कितने समय में किया जाएगा।
    यदि किसी प्रकरण में तकनीकी त्रुटि है, तो संबंधित किसान को लिखित अथवा स्पष्ट रूप से उसकी जानकारी दी जानी चाहिए। इससे किसान बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से बच सकेंगे।

    5. खाद-बीज और कृषि लागत के कर्ज से चिंतित किसान

    धान की खेती में किसानों को खाद, बीज, कृषि मजदूरी, जुताई और अन्य आवश्यक कार्यों पर काफी खर्च करना पड़ता है। अनेक किसान इन खर्चों के लिए कर्ज भी लेते हैं।

    ऐसे में यदि फार्मर आईडी अथवा पंजीयन संबंधी समस्या के कारण धान बेचने में बाधा आती है, तो किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। समय पर धान की बिक्री नहीं होने से उनके सामने कर्ज चुकाने और आगामी कृषि कार्यों के लिए धन की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
    इसलिए किसान चाहते हैं कि उनकी समस्या को सामान्य कार्यालयीन प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि इसे कृषि और आजीविका से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए प्राथमिकता से हल किया जाए।

    6. राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल

    किसानों का कहना है कि राजस्व विभाग में फौती, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य भूमि संबंधी कार्यों के लिए भी लोगों को कई बार लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। यदि इन कार्यों का समय पर निराकरण नहीं होता, तो आम नागरिकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
    एग्रीस्टैक फार्मर आईडी की मौजूदा समस्या ने एक बार फिर राजस्व सेवाओं की जवाबदेही और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। किसानों की मांग है कि लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों को समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए जाएं।

    7. सरकार की छवि पर पड़ सकता है प्रतिकूल प्रभाव

    किसानों का आरोप है कि योजनाओं और कृषि संबंधी प्रक्रियाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने से आम जनता में सरकार के प्रति नाराजगी पैदा हो सकती है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रशासनिक तंत्र की है।
    कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि यदि जानबूझकर अनुमोदन रोके जा रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, अधिकारियों द्वारा सरकार की छवि धूमिल करने या आंदोलन का समर्थन करने के उद्देश्य से ऐसा किए जाने का फिलहाल कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इस पहलू की जांच तथ्यों और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही की जानी चाहिए।
    वहीं, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित राजनीतिक पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसानों का कहना है कि संकट के इस समय में उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाकर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    8. प्रशासन से किसानों की प्रमुख मांगेंकिसानों की समस्या को देखते हुए प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की जा रही हैं—

    एग्रीस्टैक फार्मर आईडी में संलग्न सभी लंबित खसरा नंबरों का शीघ्र अनुमोदन किया जाए।
    तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी और खाद्य विभाग के बीच अनुमोदन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट समन्वय स्थापित किया जाए।

    लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर प्रत्येक मामले की स्थिति और देरी का कारण स्पष्ट किया जाए।
    तकनीकी त्रुटि अथवा डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव से प्रभावित किसानों के मामलों की जांच कर सुधार किया जाए।

    धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 नवंबर तक की जाए, ताकि पात्र किसानों को पर्याप्त समय मिल सके।

    दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए विशेष शिविर लगाकर फार्मर आईडी और पंजीयन संबंधी समस्याओं का निराकरण किया जाए।

    यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा जानबूझकर की गई अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

    प्रशासन किसानों को स्पष्ट जानकारी देने के लिए जिम्मेदार अधिकारी और संपर्क व्यवस्था निर्धारित करे।

    9. अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी किसानों की निगाहें

    पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के दूरस्थ गांवों में एग्रीस्टैक फार्मर आईडी और खसरा अनुमोदन से जुड़ी समस्या का समाधान किसानों के लिए बेहद जरूरी हो गया है। किसानों की मांग है कि तकनीकी और कार्यालयीन प्रक्रियाओं के बीच उन्हें परेशान न होना पड़े तथा धान खरीदी से पहले उनकी सभी पात्रता संबंधी औपचारिकताएं पूरी कराई जाएं।

    अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं, लंबित खसरा नंबरों के अनुमोदन के लिए क्या कदम उठाते हैं और किसान पंजीयन की अवधि बढ़ाने की मांग पर क्या निर्णय लेते हैं।
    किसानों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर समाधान चाहिए, ताकि उनकी मेहनत से उपजी धान की फसल की बिक्री में कोई बाधा न आए।

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    विनोद जायसवाल

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