कटघोरा के वार्ड क्रमांक 2 में गहराया भीषण जल संकट: भारी बारिश के बीच बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग, नगर पालिका के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर,,
कोरबा/कटघोरा: नगर पालिका परिषद कटघोरा में पेयजल की समस्या थमने का नाम नहीं ले रही है। ताज्जुब की बात यह है कि इस भारी बरसात के मौसम में भी कटघोरा के कई इलाकों में जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। वार्डवासियों द्वारा बार-बार शिकायत करने पर कुछ दिनों के लिए तो राहत दे दी जाती है, लेकिन इसके बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे आम नागरिकों के बीच अब नगर पालिका प्रशासन और जल प्रबंधन के खिलाफ गहरा आक्रोश पनप रहा है।
तहसील कॉलोनी में नलों से पानी गायब, घरेलू काम-काज ठप
ताजा मामला तहसील कॉलोनी (वार्ड क्रमांक 2) और तहसील भाठा मोहल्ला का है, जहाँ 17 अगस्त से घरेलू नलों में एक बूंद पानी नहीं आया है। पानी की आपूर्ति ठप होने से क्षेत्र के लोग पीने के पानी और अन्य दैनिक आवश्यकताओं के लिए भारी परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने संबंधित सीएमओ (मुख्य नगरपालिका अधिकारी) और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को इस गंभीर समस्या से कई बार अवगत कराया है, लेकिन स्थायी समाधान निकालने के बजाय केवल आश्वासन ही दिया जाता है।
मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी: नगर पालिका जल प्रबंधन पर उठे सवाल
साफ पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि लगातार शिकायतों और बरसात के मौसम के बावजूद कटघोरा नगर पालिका का जल प्रबंधन इतना गैरजिम्मेदार क्यों बना हुआ है?
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अस्थायी समाधान की नीति: शिकायत मिलने पर दो-चार दिन के लिए जलप्रदाय शुरू कर देना और फिर बंद कर देना पालिका की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
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प्रभावित वार्डों की बढ़ती संख्या: केवल वार्ड 2 ही नहीं, बल्कि कटघोरा के अन्य कई वार्डों में भी पेयजल आपूर्ति नियमित नहीं हो पा रही है।
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व्यवस्था की नाकामी: मानसून के समय जब नदियाँ और जल स्रोत लबालब हैं, तब भी पाइपलाइन और सप्लाई तंत्र का चरमरा जाना प्रबंधन की नाकामी को दर्शाता है।












