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    स्वर कोकिला की पहली पुण्यतिथि आज, 36 भाषाओं में दी अपनी आवाज, इस गाने ने बदली किस्‍मत

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल06/02/2023
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    स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आज पहली पुण्यतिथि है. लता दीदी को गए एक साल गुजर गया, लेकिन उनकी यादें आज भी ताजा हैं. 6 फरवरी,2022 को आज ही के दिन उनका निधन हो गया था. 92 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली थी. अपने आठ दशक से ज्यादा के करियर में उन्होंने 36 भाषाओं में तकरीबन 50,000 से ज्यादा गाने गाए थे.

    कलाकारों के परिवार से थीं स्वर कोकिला
    लता मंगेशकर की बहन और मशहूर गायिका आशा भोंसले के बारे में तो सभी जानते हैं. लता जी के परिवार में सभी कलाकार थे. उनके पिता एक थिएटर चलाया करते थे. एक दिन उन्होंने लता को गाते हुए सुना और उनकी मां से कहा कि हमारे घर पर ही एक गायक है. उनकी दो छोटी बहनें मीना खाड़ीकर और ऊषा मंगेशकर भी सिंगर हैं.

    36 भाषाओं में दी है अपनी आवाज
    लता जी ने सिर्फ हिंदी और उर्दू भाषाओं के गानों में ही राज नहीं किया बल्कि सारे देश में 36 भारतीय भाषाओं, मराठी, तमिल, भोजपुरी, कन्नड़ा, बंगाली जैसी कई भाषाओं में अपनी आवाज दी.

    पिता ने की भी बेटी के सिंगर बनने की भविष्यवाणी
    लता जी जब 13 साल की थीं, तभी उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया था और लता जी पर पारिवारिक जिम्मेदारी आ गईं थीं.  एक बार एक इंटरव्यू में लता जी ने कहा था कि अगर मेरे पिता जिंदा होते तो आज में सिंगर न होती. उन्होंने बताया था कि उनके पिता को लंबे समय तक ये नहीं मालूम था कि लता जी के पास इतनी सुरीली आवाज है. जब उन्‍हें इस बात का पता चला, तो वो उनकी प्रतिभा को निखारना चाहते थे और बेटी लता से गीत सुनाने के लिए कहा करते थे, लेकिन लता जी को पिता से बहुत शर्म लगती थी और वे रसोई में अपनी मां के पास भाग जाया करती थीं. लेकिन पिता उनकी आवाज से ये भांप गए थे कि उनकी बेटी एक समय बाद बहुत बड़ी सिंगर बनेगी.

    गुलाम हैदर ने दिया था पहला ब्रेक
    बॉलीवुड फिल्म कंपोजर गुलाम हैदर ने लता को पहला ब्रेक दिया. हालांकि वह पार्टीशन के बाद लाहौर चले गए. उन्होंने लता को फिल्म मजबूर 1948 में गाना “दिल मेरा तोड़ा” गाने को अपनी आवाज देने की पेशकश की.

    इस गाने ने बदल दी किस्‍मत
    लता जी के रिजेक्‍शन की बात मास्टर गुलाम हैदर को पसंद नहीं आयी और उन्‍होंने लता को स्टार बनाने की ठान ली. साल 1948 में लता को फिल्म ‘मजबूर’ में मास्टर गुलाम हैदर में एक गाना गवाया, गाने के बोल थे ‘दिल मेरा तोड़ा’. ये गाना काफी हिट हुआ और इसके बाद लता ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

    पहले गीत से हुई थी 25 रुपए की कमाई
    लता मंगेशकर ने सिर्फ 13 साल की उम्र में  फिल्म ‘पहिली मंगलागौर’ से डेब्यू किया था और उनकी पहली कमाई 25 रुपए थी. 18 साल की उम्र में मास्टर गुलाम हैदर ने फिल्म ‘मजबूर’ के गीत से लता जी को पहचान मिली. इस फिल्‍म में लता जी को मुकेश के साथ गाना गाने का भी मौका मिला था. फिल्‍म के बोल थे ‘अंग्रेजी छोरा चला गया’. इसके बाद लता जी ने इंडस्‍ट्री के लिए हजारों गीत गाए और गायिकी के लिए कई विश्व रिकॉर्ड बनाए.

    कुकिंग की शौकीन थीं लता
    लता जी की सिंगिंग के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन कम लोग जानते हैं कि वे कुकिंग की भी शौकीन थीं. कहा जाता है कि लता जी चिकन और हलवा बहुत अच्‍छा बनाती थीं. जिसने भी उनके हाथ का चिकन खा लिया, वो उस स्‍वाद को कभी भुला नहीं पाया. इसके अलावा लता जी खाने पीने की बहुत शौकीन थीं. सी फूड खासकर गोवा की फिश और समुद्री झींगे उन्‍हें बहुत पसंद थे. इसके अलावा केसर जलेबी भी उन्‍हें बेहद प्रिय थी.

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