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    Home » हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली कैसी हो ? डॉ. गजेंद्र तिवारी
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    हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली कैसी हो ? डॉ. गजेंद्र तिवारी

    विनोद जायसवालBy विनोद जायसवाल13/01/2023
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    कोरबा :– छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल पाली के शिक्षाविद प्राचार्य एवं कैरियर  काउंसलर डॉ गजेंद्र तिवारी का मानना है कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली हमारी मनोवृति का निर्माण हमारे जीवन हमारे आचरण के अनुरूप ही होता है हमारे जीवन तथा आचरण का मूल आधार है हमारी शिक्षा किसी देश का विकास उस देश की शिक्षा प्रणाली पर निर्भर होता है क्योंकि देश की उन्नति के लिए हर व्यक्ति जिम्मेदार है और वही देश को अपने ज्ञान संस्कार और अच्छे आचरण के जरिए देश को बुलंदियों पर पहुंचा सकता है आज का शिक्षित वर्ग ही देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चला सकता है किंतु अगर शिक्षा प्रणाली ही ठीक ना हुई तो उस देश का भविष्य अंधकारमय हो सकता है आज जरूरत है एक अच्छी शिक्षा प्रणाली की जिससे ज्ञानवान और एक अच्छे आचरण वाला व्यक्ति बन सके l

    डॉ. गजेंद्र तिवारी का मानना है कि आजकल हर जगह शिक्षा प्रचार प्रसार की नई नई योजनाएं बन रही है हमारी राष्ट्रीय सरकार इस बात की घोषणा कर चुकी है कि वह शीघ्र ही देश से निरक्षरता को मिटा देगी परंतु विचार यह करना है कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली कैसी है और वह किस प्रकार के जीवन का निर्माण कर रही है तथा हमारे शिक्षा वास्तव में कैसी होनी चाहिए आजकल हमारी शिक्षा की व्यवस्था वास्तव में बहुत दोष युक्त हो गई है इसको मिटाकर हमें ऐसी शिक्षा दीक्षा का विधान करना होगा जो हमें स्वयं अपने ऊपर विजय प्राप्त कर सकने में समर्थ बना सके ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही होना चाहिए जब तक शिक्षा के कुछ उद्देश्य निर्धारित नहीं होंगे तब तक शिक्षा प्रणाली में कोई सुधार नहीं हो सकता इसलिए शिक्षा के कुछ उद्देश्य हैं जिसमें जनतांत्रिक नागरिकता का विकास हो जिससे इस देश के जनतंत्र को सफल बनाने के लिए प्रत्येक बालक को सच्चा ईमानदार तथा कर्मठ नागरिक बनाना परम आवश्यक है अतः शिक्षा का परम उद्देश्य बालक को जनतांत्रिक नागरिकता की शिक्षा देना भी है जिससे वह नागरिक के रूप में देश की राजनीति सामाजिक आर्थिक तथा सांस्कृतिक सभी प्रकार की समस्याओं पर स्वतंत्रता पूर्वक चिंतन और मनन करके अपना निजी निर्माण लेते हुए स्पष्ट विचार व्यक्त कर सकें कुशल जीवन यापन कला की दीक्षा शिक्षा का दूसरा उद्देश्य भी होना चाहिए कि बालक को समाज में रहने जीवन यापन की कला में दीक्षित करना है एकांत में रहकर व्यक्ति ना तो  जीवन यापन कर सकता और ना ही पूर्ण विकसित हो सकता उसके स्वयं के विकास में समाज के कल्याण के लिए यह आवश्यक है कि वह अस्तित्व की आवश्यकता को समझते हुए व्यावहारिक अनुभवों द्वारा सहयोग के महत्व का मूल्यांकन करना सीखें व्यवसाय कुशलता की उन्नति शिक्षा का उद्देश होना चाहिए कि बालकों में व्यवसायिक कुशलता की उन्नति करना है इसको प्राप्त करने के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है अतः बालकों के मन में श्रम के प्रति आदर तथा रुचि उत्पन्न करना एवं हस्तकला के कार्य पर बल देना परम आवश्यक है यही नहीं पाठ्यक्रम विभिन्न व्यवसायों को भी उचित स्थान मिलना चाहिए प्रत्येक बालक अपनी रूचि के अनुसार व्यवसाय शिक्षा समाप्त करना चाहता हूं व्यक्तित्व विकास शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बालक के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास करना होता है व्यक्ति के विकास का तात्पर्य बालक के बौद्धिक विकास शारीरिक सामाजिक तथा व्यवसायिक आदि सभी पक्षों एवं रचनात्मक शक्तियों के विकास से हैं इस उद्देश्य के अनुसार बालकों को क्रियात्मक तथा कार्यों को करने के लिए प्रेरित करना चाहिए जिससे उन से साहित्य कलात्मक एवं सांस्कृतिक आदि नाना प्रकार की रूचि का निर्माण हो जाए
    डॉक्टर गजेंद्र तिवारी का मानना है कि उक्त उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जा सकता है और छात्रों के भविष्य को संवारा जा सकता है यदि शिक्षक का कर्तव्य है छात्रों का सर्वांगीण विकास करना है तो शिक्षा प्रणाली का कर्तव्य होता है कि वह भी छात्रों के सर्वांगीण विकास में अपनी जिम्मेदारी को पूरा करें l
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