कटघोरा नगर पालिका को झुकना पड़ा: किसानों के उग्र तेवरों के आगे घुटने पर आया प्रशासन, आंदोलन स्थगित

कटघोरा। नगर की बदहाल व्यवस्था और जनसमस्याओं को लेकर मोर्चे पर डटे मूलनिवासी किसान संघ छत्तीसगढ़ के कड़े रुख के सामने अंततः कटघोरा नगर पालिका प्रशासन को बैकफुट पर आना ही पड़ा। 15 अगस्त से बेमियादी भूख हड़ताल की चेतावनी से प्रशासनिक महकमे में मची खलबली के बाद, मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने स्वयं लिखित आश्वासन पत्र जारी कर किसानों की मांगों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रशासन के इस त्वरित कदम के बाद किसान संघ ने अपना धरना-प्रदर्शन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
11 अगस्त से जारी था मोर्चा, 15 अगस्त से भूख हड़ताल का था ऐलान

उल्लेखनीय है कि नगर की दुर्दशा को लेकर मूलनिवासी किसान संघ ने 11 अगस्त से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया था। लगातार चार दिनों तक चले धरने के बाद किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि नगर पालिका प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वे आमरण अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होंगे। किसानों के इस ‘करो या मरो’ के रुख को देखते हुए अधिकारी तुरंत हरकत में आए और लिखित प्रतिवेदन सौंपा।

किसानों के दबाव में इन प्रमुख मुद्दों पर बनी सहमति:
- सुलभ इंटरनेशनल को अल्टीमेटम: न्यू बस स्टैंड स्थित सुलभ शौचालय में व्याप्त गंदगी और रात में ताला बंद रखने की शिकायतों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पालिका प्रशासन ने संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी किया है। 3 दिनों के भीतर व्यवस्था दुरुस्त न होने पर अनुबंध समाप्त करने की चेतावनी दी गई है।
- आवारा मवेशियों पर धरपकड़ शुरू: शहर की प्रमुख सड़कों पर हादसों का कारण बन रहे मवेशियों को हटाने के लिए काउ कैचर गाड़ियां तैनात कर दी गई हैं। पकड़े गए मवेशियों को ग्राम-अमरपुर गौठान भेजा जा रहा है।
“काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती” – किसान संघ की चेतावनी
मूलनिवासी किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री लाल बहादुर सिंह कोराम ने कहा कि यह तो केवल शुरुआत है। प्रशासन को दिए गए लिखित आश्वासनों को जमीन पर उतारना ही होगा। यदि तय समय-सीमा के भीतर समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ और टालमटोल की नीति अपनाई गई, तो किसान संघ पुनः बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।











