एसईसीएल की वादाखिलाफी: 11 वर्षों से रोजगार को भटक रहे भू-विस्थापित, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने दी 15 दिनों में तालाबंदी की चेतावनी,,
पोड़ी उपरोड़ा कोरबा—– एस ई सी एल (SECL) रानीअटारी चिरमिरी क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के बदले रोजगार न मिलने का मामला अब गरमा गया है। ग्राम पंचायत कोरबी के पीड़ित किसानों के समर्थन में उतरते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य श्री विद्वान सिंह मरकाम ने शासन-प्रशासन को अल्टीमेटम जारी किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर भू-विस्थापितों को रोजगार नहीं मिला, तो एसईसीएल प्रबंधन के विरुद्ध उग्र आंदोलन और तालाबंदी की जाएगी।
सुने जिला अध्यक्ष ने क्या कहा,,
11 साल का लंबा इंतजार: हक की लड़ाई जारी
मामला वर्ष 2014 का है, जब पुनर्वास नीति के तहत रानीअटारी चिरमिरी क्षेत्र द्वारा आवासीय कॉलोनी बनाने के लिए ग्राम पंचायत कोरबी के सात किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था।
विडंबना यह है कि:
विलंब से मुआवजा: अधिग्रहण के 4 साल बाद 2017 में मुआवजा राशि प्रदान की गई,
दस्तावेजों का बहाना: किसानों का आरोप है कि रोजगार के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद, प्रबंधन जानबूझकर कमियाँ निकालकर उन्हें 11 वर्षों से परेशान कर रहा है।
प्रशासनिक अनदेखी: पीड़ित किसानों ने कई बार शासन-प्रशासन को इस संबंध में आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
,,गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का कड़ा रुख,,
विद्वान सिंह मरकाम ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) पोड़ी उपरोड़ा को सौंपे पत्र में कहा कि प्रबंधन की नीयत किसानों को रोजगार देने की नहीं, बल्कि उन्हें भटकाने की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि:
15 दिनों की समय सीमा: इसके भीतर सभी पात्र विस्थापितों को नौकरी दी जाए।
तालाबंदी और घेराव: मांग पूरी न होने पर रानीअटारी विजय वेस्ट खदान का काम ठप कर दिया जाएगा।
जिम्मेदारी का निर्धारण: आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए शासन और एसईसीएल प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
प्राइवेट कंपनियों और फर्जी ग्राम सभाओं का विरोध
खबर के मुताबिक, केवल एसईसीएल ही नहीं बल्कि निजी कंपनियों के प्रति भी ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
रोंगटा कंपनी पर आरोप:
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रोंगटा कंपनी द्वारा सरपंचों को भ्रमित कर ‘फर्जी ग्राम सभा’ के माध्यम से प्रस्ताव पास कराने की कोशिश की जा रही है।
लगातार धरना: पिछले 20 दिनों से ग्रामीण इन फर्जी प्रस्तावों और भूमि अधिग्रहण की नीतियों के खिलाफ प्रभावित क्षेत्रों में डटे हुए हैं।
भविष्य का निर्णय: किसानों और क्षेत्रवासियों ने अब यह संकल्प लिया है कि जब तक पुराने विस्थापितों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक पोड़ी उपरोड़ा तहसील क्षेत्र में किसी भी नई खदान को खुलने नहीं दिया जाएगा।
निष्कर्ष: “प्रबंधन द्वारा छल-कपट से भूमि तो ले ली जाती है, लेकिन जब रोजगार और हक देने की बारी आती है, तो नियम-कायदों का जाल बुनकर गरीब किसानों को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया जाता है। कोरबी के किसान इसका जीता-जागता प्रमाण हैं।”